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झाबुआ:-मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सरकार के दावों की पोल खोल रही है। जिन केंद्रों में आज तक बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां एलईडी टीवी और आरओ मशीनें लगाने का निर्णय न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि यह सरकारी धन की खुली बर्बादी का उदाहरण है।
यह अत्यंत गंभीर विषय है कि जिन आंगनवाड़ी केंद्रों में जलस्रोत (बोरिंग/हैंडपंप) तक उपलब्ध नहीं हैं, वहां आरओ उपकरण लगाए जा रहे हैं। बिना पानी के आरओ मशीनें केवल दिखावा बनकर रह जाएंगी। यह फैसला जमीनी जरूरतों से पूरी तरह कटा हुआ है और केवल कागजों में विकास दिखाने का प्रयास है।
डॉ. विक्रांत भूरिया, अध्यक्ष अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस एवं विधायक झाबुआ ने महिला एवं बाल विकास मंत्री पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह विभाग बच्चों और महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा है, लेकिन वर्तमान में यह गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही का शिकार हो चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना इंस्टॉलेशन और वेरिफिकेशन के भुगतान किया जाना सीधा-सीधा भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ी की ओर संकेत करता है। कई जिलों में उपकरण गोदामों में पड़े हैं, लेकिन भुगतान हो चुका है — यह बेहद गंभीर मामला है।
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डॉ. भूरिया ने आंगनवाड़ी व्यवस्था की प्रमुख समस्याएं गिनाईं:
1. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है।
2. कई केंद्र जर्जर भवनों या किराए के कमरों में संचालित हो रहे हैं।
3. पीने का पानी, शौचालय और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
4. कुपोषण जैसी गंभीर समस्या पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
5. बच्चों और महिलाओं के लिए पर्याप्त एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध नहीं है।
6. कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त सर्वे और प्रशासनिक कार्यों का बोझ बढ़ता जा रहा है।
7. दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत कार्यकर्ताओं को सुरक्षा, संसाधन और प्रशिक्षण की कमी है।
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सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल
डॉ. भूरिया ने कहा कि सरकार को दिखावटी योजनाओं के बजाय बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।
पहले हर आंगनवाड़ी में पानी, बिजली, सुरक्षित भवन और पोषण सुनिश्चित किया जाए — उसके बाद ही आधुनिक उपकरणों की बात की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में प्रति बालक/बालिका पर प्रतिदिन 10 रुपये से भी कम खर्च किया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है और सरकार की संवेदनहीन प्राथमिकताओं को उजागर करता है।
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मुख्य मांगें:
• पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए
• दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो
• आंगनवाड़ी केंद्रों में बिजली, पानी और भवन की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए
• कार्यकर्ताओं का मानदेय समय पर दिया जाए
• कुपोषण दूर करने के लिए ठोस और प्रभावी योजना लागू की जाए
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चेतावनी
यदि सरकार शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाती है, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाकर लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करेगी।
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